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Showing posts from July, 2019

surj

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Shiddharth: तुम लिखोगे नहीं तो क्या हम दिखेंगे नहीं ?

Shiddharth: तुम लिखोगे नहीं तो क्या हम दिखेंगे नहीं ? : तुम लिखोगे नहीं तो क्या हम दिखेंगे नहीं ? वासुदेव बलवन्त फड़के ; वो नाम जिसे मिटाने के लिए अंग्रेजों ने एड़ी चोटी का जोड़ लगा दि...

सोनी सोरी

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सोनी सोरी इस नाम से जो भी लोग परिचित हों वो, इसे अवश्य पढ़ें… वो लोग भी पढ़ें जिन्हें पुलिस हर हाल में शराफ़त के पुतले ही दिखते हैं। उनके हिसाब से पुलिस की कहीं कोई गलती होती ही नहीं। और मैं आज कल पुलिस की शराफ़त को ही पढ़ रही हूँ। सोनी सोरी छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित जबेली गाँव की एक आदिवासी विद्यालय शिक्षिका हैं और साथ ही सामाजिकी कार्यकर्ता भी। सोनी सोरी ने 27 जुलाई 2012 को जेल से सुप्रीम कोर्ट के नाम भेजे गये पत्र में कहा है कि… ‘ आज जीवित हूं तो आपके आदेश की वजह से ! आपने सही समय पर आदेश देकर मेरा दोबारा इलाज कराया !… एम्स अस्पताल दिल्ली में इलाज के दौरान बहुत ही खुश थी कि मेरा इलाज इतने अच्छे से हो रहा है ! पर जज साहब, आज उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है ! मुझ पर शर्मनाक अत्याचार प्रतारणा की जा रही है ! आपसे निवेदन है , मुझ पर दया कीजियेगा ! .. जज साहब इस वख्त मानसिक रूप से अत्यधिक पीड़ित हूं ! (१) मुझे नंगा कर के ज़मीन पर बिठाया जाता है ! (२) भूख से पीड़ित किया जा रहा है (३) मेरे अंगों को छूकर तलाशी किया जाता है …..! जज साहब छतीसगढ़ सरकार , पुलिस प्रशासन मेरे कपडे कब तक उ...

Shiddharth: बेशक थोड़ी मजबूर हूँ, पर हाँ मैं भी एक मजदूर हूँ ।

Shiddharth: बेशक थोड़ी मजबूर हूँ, पर हाँ मैं भी एक मजदूर हूँ । : .1. सौ में नब्बे आदमी हर दौर में मजदूर है  सौ में नब्बे आदमी हर दौर में मजदूर है बांकी जो भी बचे वो सेठ हैं, जो मगरुर हैं। क...

"भगत सिंह पैदा हो, मगर मेरे घर में नहीं पड़ोसी के घर में"

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"भगत सिंह पैदा हो, मगर मेरे घर में नहीं पड़ोसी के घर में" पता नहीं मुझे ये किस ने कहा, मगर कहा जिस ने भी वो हिंदुस्तान के जनता के नस- नस को पहचानता था।  गजब हाल है इस देश का,  लगता है  देश में सारे मसले खत्म हो चुके हैं। सभी की सुई शाक्षी और अजितेश के शादी पे ही टिकी है सारे मसले खड्ढे में चले गए। यही पिछले कुछ सालों में देखती आरही हूँ। जरूरी मुद्दे फालतू के बकवास के निचे दब जाते हैं।  सब को लग रहा है इन दोनों के शादी से क्रांति आ जानी है, अरे छोड़ो भी काहे की क्रांति आ जायेगी। पहले अपने-अपने गिरेबान में झांको फिर बोलना।  अच्छा आज तक bjp वाले ही पूछते थे न 70 सालों में देश में क्या हुआ ? तो चलो इस बार मैं पूछती हूँ। उन सब से जो बाबा साहेब को मानते पूजते और पढ़ते हैं।  क्या कर लिया  70 सालों में,  कौन सा जातिवादिता से छुटकारा पाने का समुचित उपाय किया ? ये जो जातियों के अंदर हजार जाति बैठी है उस से निकलने के लिए क्या किया ? सिर्फ गाल बजाने से होता है क्या ? कि कुछ करना भी परता है,उसके लिए। तो मुझे बताओ सारे नए-नए बने क्रांतिकारियों कि किया क्...

मेरी कलम !

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*** ** 05.11.19 मैं सोचती हूँ ! शहर के हर दीवार पे तुम्हें उकेर दूँ फिर सोचता हूँ... तुम्हारी सोच को, हर स्कूल के आंगन में बिखेर दूँ मैं सोचता हूँ... सोचने वाली हर सोच को तुम्हारा 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' का ध्रुवतार उधार दूँ मैं सोचता हूँ... मैं ये क्या सब और क्यूँ सोचता हूँ... ...सिद्धार्थ *** *** 24 .10 .19 *** 24 .10 .19 *** *** 25 .10 .19 *** *** 25 .10 .19 ** माटी के हांथों से माटी के दिए बनाए हैं ले लो सोने के दिलवाले ख़ुशियाँ बेचने हम आये हैं, रहे उजाला तुम्हारे घर आंगन में सब को ख़ुशियों का उपहार मिले मेरे घर में भी बाल गोपाल हैं, उनके लब पर भी दीपावली की मीठी मुस्कान खिले अंधेरे आंगन में भी कुछ दीप जले रहो सलामत तुम और तुम्हारे बच्चे हम को तो बस कुछ अनुदान मिले मेरे बच्चे खाये बतासा जलेबी तुम्हारे बच्चों को रोगन बादाम मिले ! ...सिद्धार्थ 26 .10 .19  कोई बेच रहा है तुझको कोई खरीद रहा है तुझको अब तू ही बता दे मुझको जो मोल ली और दी गई भगवान कहूं मैं कैसे उसको...? ...सिद्धार्थ 26 .10 19 *** ...