"भगत सिंह पैदा हो, मगर मेरे घर में नहीं पड़ोसी के घर में" पता नहीं मुझे ये किस ने कहा, मगर कहा जिस ने भी वो हिंदुस्तान के जनता के नस- नस को पहचानता था। गजब हाल है इस देश का, लगता है देश में सारे मसले खत्म हो चुके हैं। सभी की सुई शाक्षी और अजितेश के शादी पे ही टिकी है सारे मसले खड्ढे में चले गए। यही पिछले कुछ सालों में देखती आरही हूँ। जरूरी मुद्दे फालतू के बकवास के निचे दब जाते हैं। सब को लग रहा है इन दोनों के शादी से क्रांति आ जानी है, अरे छोड़ो भी काहे की क्रांति आ जायेगी। पहले अपने-अपने गिरेबान में झांको फिर बोलना। अच्छा आज तक bjp वाले ही पूछते थे न 70 सालों में देश में क्या हुआ ? तो चलो इस बार मैं पूछती हूँ। उन सब से जो बाबा साहेब को मानते पूजते और पढ़ते हैं। क्या कर लिया 70 सालों में, कौन सा जातिवादिता से छुटकारा पाने का समुचित उपाय किया ? ये जो जातियों के अंदर हजार जाति बैठी है उस से निकलने के लिए क्या किया ? सिर्फ गाल बजाने से होता है क्या ? कि कुछ करना भी परता है,उसके लिए। तो मुझे बताओ सारे नए-नए बने क्रांतिकारियों कि किया क्...