की कहु पहुना
की कहू पहुना की कहू पहुना अई बेर के कार्तिक में सब किछु बदैल गेलई अहुना रहई छी कहुना, जीबई छी कहुना गेल छलखिन परदेश भईया पूसक मास में, कहले छलखिन रुपया भेजब कार्तिक मास में जाईत जाईत इहो कही के गेल छलखीन "दीन दुनिया खराब छै से बहीना रहीए नजर कईनका सम्भाईल के चिट्ठी पत्री भेजब हम पढ़ीहैं समभाईल के" फागुन में चिठ्ठी एलई भुषना पईढ के बतैलकै " माय बाबू के परनाम करई छी अंहा के प्यार हम लीखई छी छोटकी बहीन के दुलार हम भेजई छी माय - बाबू लेल नया नूआ - धोती हम पठायब छोटकी बहीन के सूगा बाला फ्राक आ टोपी पहीनायब जरी बाला चुनरी लाल चुड़ी कतैक दिन से अहां मगैछी से हो अई बेरा भेज देब अंहा नई अगुतायब हम सब किछ जनई छी हे बहीना की कहूं बहीना ... जोडई छी रुपया कहुना - कहुना किछ रुपया जे भेजब समहाईर ओकरा रखिहैं दीवाली आ छईठ में नैका कपडा लत्ता पीन्ह के आंगन में सरसों तेल बाला ढीबरी जलबीहैं गमकौआ भात संगे नीमन तीमन तरकारी स...