Posts

Showing posts from April, 2019

Shiddharth: आग तो लगी है, पर 'बर्बाद' सिर्फ मैं नहीं, दिख नहीं...

Shiddharth: आग तो लगी है, पर 'बर्बाद' सिर्फ मैं नहीं, दिख नहीं... : . 1 .  किसान हूँ  किसान हूँ मैं , ख़ुशी से सब के भूख को ढोता हूँ सब के हिस्से का दुख , खुद में ही समोता ह...

चोट

एक मुनिया एक मुनिया अलसाई सी बैठी है खुद को सिकुड़ाई सी पूछ रही है पास में बैठे बाबा से  हम दुनियां में क्यूं लाए गए हैं क्या छल से हम बुलाए गए हैं विधना (भगवान) के थे गर चार चार बच्चे सब ही रहे होंगे मन के सच्चे फिर अलगुआ (बटवारा) में जूठन ही क्यूॅं आये हमारे हीस्से  क्या विधना के मन के भी थे दो चार हीस्से एक को मिला पोथी पुराण दूजे को बरछी कमान तीजे ने भंडार चुना हम को क्यूं पैरों का छारण सब के हिस्से का मैला उठावन क्या विधना भी छली था पड़ोस के काका जैसा ही मतलबी था लोग तो कहते हैं कि वो दाता था जो महाबली था फिर क्यूं साया हमको बदन दिया उनको सुबकती रातें हमको दिन का उजाला उनको बोलो बाबा ... क्या विधना छली था ? बाबा ....  राम जाने चिरैया  पहले बीधना आए या थे पहले मनूख जीवन के धुनि रमाए पाहन पहाड़ पूजी थी पहले या पाथर से थे पहले आग जलाए अन्न जल को पूजा पहले या थे पहले भूख मिटाए पहले काटी थी बांस घास  या मन में एक दूजे के लिए थे डाह उगाए पर, मनुख ही तो है जो  मन में है दो दो क्यारी बनाए एक में पाले प्रेम  तो दूजे में बैर का नागफणी उगाए एक में रखे दया क...

विद्रोही अभी ज़िंदा हैं !

. 1) विद्रोही अभी ज़िंदा हैं ! विद्रोही मरे नहीं, विद्रोही मरा नहीं करते वो ज़िंदा हैं ! जब तक शोषण ज़िंदा है जब तक शोषण के खिलाफ उठने बाली आवाज ज़िंदा जब तक हमारे कंठो में प्रतिकार ज़िंदा हैं जब तक हमारे शब्दों में  आग ज़िंदा है जब तक हम ज़िंदा हैं और  'हम ' हम अभी ज़िंदा हैं तो तय है, विद्रोही अभी ज़िंदा हैं ! 2) हम लड़ेंगे ज़रुर अंगीठी मे सिकते हुए आलू से  उठते हुए सोंधी सी गन्ध को  अपने नथूने से होते हुए भीतर कहीं महसूस करना  अच्छा लगता है न ? ठीक वैसे ही ! जाड़े के दिनों में अंगीठी जला के बैठना या गुनगुने धुप में खुद को सेकना अच्छा लगता है न ? लेकिन सरकार जिस अंगीठी पे हमें बैठा के मजे ले रही है न! उसे धर्म की अंगीठी कहती हूँ मैं जिस में सिकते हम हैं ! और मजा सेकने बाले को मिलता है  हमारे दोनों कूल्हे सिक के बेकार और वो अपनी सारी इन्द्रियों को मज़ा लेने में लगाए हुए हैं जो हमारे लिए अँगीठियाँ जलाते हैं उनके शब्दों में आग और हाँथ में बारूद होता है जिस से वो धर्म की अंगीठी जलाते हैं और हम सिकते जाते हैं तब तक जब तक हमरा जब्र जबाब न दे दे अब हम मुहाने पे हैं हमारा...