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Showing posts from August, 2021

शब्द

 शब्द को पढ़ो शब्द को पढ़ते-पढ़ते  शब्द को सुनो शब्द में शब्द मत ढूंढो शब्द में खो जाओ तब तुम समझ पाओगे शब्द वो भी बोलना जानतें हैं जिसे तुम सुनने को तैयार नही जब शब्द तुम्हारी नाभि तक उतर आये और भूचाल मचा दे रक्त में   तब पूछना उससे ! उसका मर्म वो सुसुप्ता अवस्था में भी विस्फोटक होता है... क्यूँ कि शब्द में सब निहित होता है ... 1-9-2019 ~ सिद्धार्थ

घृणा और देवता का जन्म बहुत बाद में हुआ था

जब लोग सीख रहे थे  धर्म की बोआई करना  ताल पत्रों के सीने पर उस से बहुत पहले ...   सृष्टि के पहले पुरुष और पहली स्त्री जान गये थे पेट के भूख को और सीख गया था पुरुष  स्त्री से प्रेम करना  और  स्त्री के माटी में प्रेम बोना स्त्री ने पुरुष के प्रेम को जन्म दिया स्त्री ने और स्त्रियों और पुरुषों को जन्म दीया बिल्कुल सभ्यता के सूरुआत में ही दोनों सीख गए थे  अपना और अपने प्रेम से जन्में संतानों  के भूख को मिटाना और रक्षा करना अपनी संत्तियो का उनके कंठ से तब नहीं गिरा था कोई बीज मंत्र नहीं जुड़े थे हाॅंथ किसी देवता के सामने उनका हाॅंथ बढ़ा था औजार बनाने के लिए उनका हाॅंथ बढ़ा था शिकार करने के लिए पत्थरों के सीने से आग निकालने और आग को सहेजने के लिए भूख से लडने के लिए  तब देवता नहीं जन्में थे जब भूख ने सीखा दिया था मनुष्य को धरती का सीना फाड़ कर बीज बोना और अन्न उपजाना जब देवता अस्तित्व में नहीं आए थे उस से बहुत पहले स्त्री और पुरुष किसान हो गए थे  सीख गए थे भूख से लड़ना  और एक दूसरे से प्रेम करना  घृणा और देवता का जन्म  बहुत ...